फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force-FATF)
- फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का गठन जुलाई 1989 में पेरिस में हुए जी 7 समिट में किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य मनी लांड्रिंग से निपटने हेतु उपाय करना था । इसलिए इसे ‘ग्लोबल फाइनेंशियल वॉचडॉग’ भी कहते हैं ।
- वर्तमान में इसका मुख्यालय पेरिस में है और इसमें कुल 39 सदस्य देश हैं। सऊदी अरब को 39 वें सदस्य के रूप में पिछले वर्ष इस संगठन का सदस्य बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब ऐसा पहला खाड़ी देश है जिसने इस संगठन की सदस्यता ली है।
FATF के ग्रे लिस्ट के बारे में
- एफ़एटीएफ़ द्वारा ग्रे लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है जो कि अपने देश के फाइनेंसियल सिस्टम को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपयोग होने देते हैं। इन्हें ग्रे लिस्ट में शामिल कर यह संकेत दिया जाता है कि इन गतिविधियों को ना रोकने पर वे ब्लैक लिस्ट हो सकते हैं।
- जब कोई देश ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है तो उसे निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों (विश्व बैंक, आईएमएफ , एशियाई विकास बैंक इत्यादि) और देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।
- अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या आती है।
- इसके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी आती है और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।
- पूर्णरूप से अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है।
FATF के ब्लैक लिस्ट के बारे में
- जो देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का पूर्ण और प्रत्यक्ष रूप से समर्थन करते हैं उन्हें ब्लैक लिस्ट में सूचीबद्ध किया जाता है; अर्थात इन देशों में मौजूद फाइनेंसियल सिस्टम की मदद से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिलता है।
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