संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council)

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council)

मानवाधिकार के क्षेत्र में शीर्ष वैश्विक संस्था मानवाधिकार परिषद के नियमित 46वें सत्र (22 फरवरी से 23 मार्च 2021 तक) का आयोजन किया जा रहा है।

भारत ने मानवाधिकार परिषद के 46वें सत्र के दौरान कहा कि पाकिस्तान द्वारा अल-कायदा आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख रिहा किया जाना पाकिस्तान और राज्य समर्थित आतंकवाद का एक "स्पष्ट उदाहरण" है।

कश्मीर और अन्य मुद्दों पर पाकिस्तान और तुर्की की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय राजनयिक टीम ने कहा कि भारत सरकार अपने मानवाधिकारों के दायित्वों के "पूर्ण रूप से संज्ञान" में रखता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council)

 

 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के बारे में

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council-UNHRC), संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत एक अंतरसरकारी निकाय है।

उद्देश्य:

 इसका गठन वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 15 मार्च 2006 को संकल्प 60/251 के माध्यम से किया गया था।

कार्य: 

यह दुनियाभर में मानव अधिकारों के प्रचार और संरक्षण को मजबूत बनाने और मानवाधिकार उल्लंघन की स्थितियों को संबोधित करने और उन पर सिफ़ारिश करने के लिए जिम्मेदार है।

यूएन मानवाधिकार परिषद ने पूर्ववर्ती मानव अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र आयोग का स्थान लिया था।

मुख्यालय: यूएन मानवाधिकार परिषद का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड है।

यूएन मानवाधिकार परिषद के सदस्य

यूएन मानवाधिकार परिषद 47 सदस्यों से मिलकर बनी है, इन सदस्यों का चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा बहुमत के आधार पर प्रत्यक्ष और गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है।

महासभा द्वारा सदस्यों के चयन के मामले में मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण में उम्मीदवारों राज्यों के योगदान के साथ-साथ इस संबंध में उनकी स्वैच्छिक प्रतिज्ञाओं और प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखा जाता है।

मानवाधिकार परिषद की सदस्यता में समान भौगोलिक वितरण का भी ध्यान रखा जाता है। इसमे भौगोलिक आधार पर सीटों का वितरण निम्नानुसार है:

अफ्रीका महाद्वीप से : 13 सदस्य

एशिया-प्रशांत क्षेत्र से : 13 सदस्य

लैटिन अमेरिकी और कैरिबियन क्षेत्र से : 8 सदस्य

पूर्वी यूरोपीय देशों से : 6 सदस्य

पश्चिमी यूरोप और अन्य देशों से : 7 सदस्य

सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्षो का होता है और कोई भी लगातार दो से अधिक कार्यकाल धारण नहीं कर सकता है।

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