दक्षिण एशिया में COVID-19 महामारी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव एवं उसका प्रत्युत्तर: यूनिसेफ

दक्षिण एशिया में COVID-19 महामारी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव एवं उसका प्रत्युत्तर: यूनिसेफ

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में दक्षिण एशिया में कोविड-19 महामारी के प्रभाव का आकलन करने वाली एक अध्ययन रिपोर्ट ‘दक्षिण एशिया में COVID-19 महामारी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव एवं उसका प्रत्युत्तर- Direct and Indirect Effects of COVID-19 Pandemic and Response in South Asia’ प्रस्तुत किया गया है।
  • इस अध्ययन को संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के द्वारा तैयार किया गया है एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) जैसे संस्थानों के द्वारा इसे तैयार करने में तकनीकी सहायता प्रदान की गई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया, जो कि पहले से ही गरीबी, भुखमरी, स्वास्थ्य सेवाओं की निम्न स्थिति, खस्ताहाल बुनियादी अवसंरचना इत्यादि का सामना कर रहा है, कोविड-19 महामारी का इन देशों पर बड़ा ही प्रतिकूल असर पड़ा है। कोरोना महामारी के कारण सभी प्रकार की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं-SRMNCAH (Sexual, reproductive, maternal, newborn, child and adolescent health: यौन, प्रजनन, मातृ, नवजात, बच्चे और किशोर स्वास्थ्य) व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं।
  • कोविड-19 के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति में गिरावट आने से जहां एक ओर शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर, बाल विवाह इत्यादि में वृद्धि हुई है तो वहीं दूसरी ओर टीकाकरण, बाल शिक्षा इत्यादि में उत्तरोत्तर रूप से गिरावट आई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • कोविड-19 के प्रभाव के कारण दक्षिण एशिया के 6 बड़े देशों में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की 2,28,000 अतिरिक्त मौतें हुई
  • 420 मिलियन एशियाई बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हो गए
  • मलेरिया, टीवी, एचआईवी/एड्स और थायराइड से जुड़ी समस्या के कारण अतिरिक्त 6000 किशोरों की मृत्यु हुई
  • दक्षिण एशिया में मातृत्व मृत्यु दर में 16% की वृद्धि हुई
  • बाल विवाह के मामलों में तेजी आई है
  • अवांछित गर्भावस्था के 3.5 मिलियन मामले दर्ज किए गए
  • किशोरावस्था में गर्भावस्था के 4,00,000 अतिरिक्त मामले दर्ज किए गए
  • मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर के मामलों में वृद्धि आई है
  • कुपोषण के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है विशेष रूप से बाल कुपोषण

रिपोर्ट में प्रस्तुत सुझाव

  • स्वास्थ्य सुविधाओं में दीर्घकालिक निवेश करना
  • सभी के लिए निर्बाध एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित करना
  1. प्राथमिकता प्राप्त लोगों एवं सुभेद्य लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं में वरीयता देना
  2. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े आपूर्ति श्रृंखला एवं डिलीवरी तंत्र को मजबूत करना
  3. पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) की आपूर्ति सुनिश्चित करना
  4. टीकाकरण,स्वास्थ्य एवं समुदाय आधारित पोषण कार्यक्रम जैसे आउटरीच गतिविधियों के कवरेज को बढ़ाना
  5. सर्वाधिक सुभेद्य बच्चों को पोषण का समर्थन करने वाले संस्थागत तंत्र को मजबूत करना
  • शिक्षण हेतु विद्यालयों को सुरक्षित रूप से खोला जाना
  • सुभेद्य जनसंख्या समूहों के स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देना एवं इनकी मदद करना
  • गरीब एवं सुभेद्य जनसंख्या समूहों को आवश्यक खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना जिसमें पोषणीय पहल भी शामिल हो
  • कोविड-19 महामारी से जुड़े प्रोटोकॉल, नियमों इत्यादि को लागू करना जिससे इसके प्रकोप कम किया जा सके

  • Rammilankushwaha

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