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आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv)
चर्चा में क्यों?
- चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के तेजी से प्रसार को देखते हुए एवं भारत-प्रशांत नीति को केंद्र में रखते हुए भारत सरकार आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) को जल्द कमीशन देने जा रही है।
- उल्लेखनीय है कि आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) सैटेलाइट्स, रणनीतिक मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता से युक्त है। इसकी उपरोक्त विशेषता के कारण इसे भारतीय नौसेना हेतु "हिंद महासागर का ईसीजी" कहा जा रहा है।
- इसके साथ ही आईएनएस ध्रुव रक्षा बलों को तीनों आयामों - उप-सतह, सतह और हवाई सीमा (Sub-Surface, Surface and Aerial)में बेहतर आक्रामक संचालन की योजना बनाने में मदद करेगा।

आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) के बारे में
- आईएनएस ध्रुव को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय नौसेना और भारत के रणनीतिक बल कमान और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) के द्वारा विकसित किया गया है।
- स्वदेशी रूप से विकसित इस सर्विलांस शिप को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने अपनी विशाखापत्तनम सुविधा के तहत आत्म निर्भर भारत अभियान पहल के तहत बनाया है।
- आईएनएस ध्रुव ‘एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैन्ड ऐरे रडार्स: एईएसए’ (Active Electronically Scanned Array Radars: AESA) से लैस है।उल्लेखनीय है कि ‘एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैन्ड ऐरे रडार्स- एईएसए’ तकनीक रडार तकनीक में गेम-चेंजर माना जाता है। इस तकनीक ये युक्त यह रडार भारत की निगरानी कर रहे अन्य देशों के उपग्रहों के स्पेक्ट्रम को स्कैन कर सकता है।
- आईएनएस ध्रुव में लगे ‘एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैन्ड ऐरे रडार्स- एईएसए’ रडार के जरिये इंडो-पैसिफिक में प्रतिद्वंद्वी देशों के मिसाइलों की क्षमता और रेंज का भी आकलन किया जा सकता है। यह भारतीय शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों की ओर बढ़ रही प्रतिद्वंद्वी देशों के मिसाइलों के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में भी कार्य करेगा।
- आईएनएस ध्रुव के कमीशन उपरान्त भारत P-5 (अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस और फ्रांस) के बाहर एकमात्र देश होगा जो यह क्षमता रखता है।
आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) के लाभ
- भारतीय नौसेना पहले से ही अदन की खाड़ी से लेकर दक्षिण चीन सागर तक के सभी प्रवेश मार्गों पर निगरानी रखती है। नौसेना द्वारा निगरानी के लिए मानवरहित हवाई वाहन, निगरानी विमान और बोइंग पी 8 आई एंटी सबमरीन वारफेयर इत्यादि का प्रयोग किया जाता हैं। आईएनएस ध्रुव भारत की महासागर निगरानी क्षमताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी एवं यह भारत की निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।
- इसकी विशेषता के कारण आईएनएस ध्रुव (INS Dhruv) को भारतीय नौसेना हेतु "हिंद महासागर का ईसीजी" की संज्ञा दी गयी है। उल्लेखनीय है कि ईसीजी का पूरा नाम इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG-Electrocardiogram) एवं यह हृदय में समस्याओं का निदान करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- आईएनएस ध्रुव भारतीय नौसेना को तीनों आयामों - उप-सतह, सतह और हवाई (Sub-Surface, Surface and Aerial) क्षेत्र में बेहतर आक्रामक संचालन की योजना बनाने में मदद करेगा।
- यह भारतीय शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों को प्रतिद्वंद्वी देशों के मिसाइलों के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करेगा।
- यह भारत की निगरानी कर रहे अन्य देशों के उपग्रहों के बारे में पता लगाने में सक्षम होने के कारण भारत को कई मामलों में रणनीतिक लाभ पहुचायेगा।
- चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की बढ़ती शक्ति एवं हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए भारतीय नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करेगा।
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