शहरी बाढ़ और आपदा प्रबंधन
शहरी बाढ़ -
जलग्रहण क्षेत्र में प्रसार और उसमें कंकड़-पत्थरों के जमाव के चलते पानी की अंतःस्रावण दर में कमी आती है, जिससे आगे चलकर शहरी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा होती है।
शहरों में अपेक्षाकृत कम समय तक रहने वाला, लेकिन बहुत तेज़ व अचानक ही जल का ऐसा परिदृश्य खड़ा हो जाता है, जिसे ‘शहरी बाढ़’ कहा जाता है
शहरी बाढ़ के प्रमुख कारण-
प्राकृतिक कारण: -
शहरी बाढ़ के प्रभाव -
1. सार्वजनिक भवनों, आवास और घरेलू परिसंपत्तियों को नुकसान।
2. उद्योग और व्यापार में नुकसान।
3. रोडवेज, रेलवे और अन्य सेवाओं से राजस्व की कमी।
4. पुनर्निर्माण गतिविधियों में राज्यों की आर्थिक हानि।
5. शहरी दिहाड़ी मजदूरों को नुकसान।
समाधान -
1. प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम का संरक्षण।
2. आद्रभूमियों (वेटलैंड) का संरक्षण।
3. Sponge city mission-सड़क निर्माण में स्पोंज तकनीक का इस्तेमाल और जल रिसाव के लिए ब्लॉक (block) तकनीकी
4. विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे अमृत (AMRUT) मिशन, ह्रदय योजना और स्मार्ट सिटी का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन।
5. वाटरशेड मैनेजमेंट।
6. सुनियोजित शहरी विकास और अपवाह तंत्र का निर्माण।
1. ग्लोबल वार्मिंग के कारण कम समय में अधिक वर्षा और चरम जलवायु घटनाएं।
2. उत्तरी गोलार्ध में उष्णकटिबंधीय चक्रवातो के कारण भारतीय भूमि पर अधिक वर्षा।
4. लौटता मानसून- बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब क्षेत्र।
5. जलवायु परिवर्तन तथा अल नीनो और ला नीना की घटनाएं।
मानव जनित कारण: -
1. आधारभूत ढांचा नियोजन का अभाव।
2. प्राकृतिक आद्रभूमियों (वेटलैंड) की समाप्ति।
3. कंक्रीट के जंगलों का निर्माण- भूमिगत जल रिसाव कम।
4. विभिन्न हित धारकों और संस्थाओं (नगर निगम, आपदा प्रबंधन टीम, सिविल बॉडीज, नागरिक समाज, एनजीओ, केंद्र और राज्य सरकारें) के मध्य समन्वय का अभाव।
5. वाटरशेड मैनेजमेंट।
6. सुनियोजित शहरी विकास और अपवाह तंत्र का निर्माण।
7. SDG लक्ष्य 11
8. विभिन्न शेयरधारकों और संस्थाओं के मध्य समन्वय
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