आतंकवाद की समस्या, कारण और समाधान ( What is Terrorism Problem)

               

                        आतंकवाद

परिभाषा=      राजनीती ,सामाजिक ,आर्थिक हितो की पूर्ति के लिये हिंसा का सहारा लेना । इसके तहत सरकार एवं नागरिको में डर ,भय पैदा किया जाता है


परीभाषा  =   आंतकबाद वह विचार जिसके अंतर्गत भय का बातावरण वनाकर अपने उद्देश्य को प्राप्त किया जाए आतंकवाद कहते है /

परीभाषा =     सयुक्तराष्ट्र के अनुसार जनसंख्या को भयभीत करने बाले और शारीरिक मानसिक हानी पहुंचने बाले आपराधिक क्रत्यो का नाम आतंकवाद है /

भारत में आतंकवाद के स्वरूप

  • नृजातीय आतंकवाद
  • धार्मिक आतंकवाद
  • विचारधारोन्मुख आतंकवाद

नृजातीय आतंकवाद :

  • विभिन्न नृजातीय समूहों में पहचान संकट,संसाधन संकट तथा सांस्कृतिक साम्राज्यवाद की संकल्पना के फलस्वरूप होने वाला आतंकवाद नृजातीय आतंकवाद कहलाता है। यह भारत के उत्तरपूर्व क्षेत्र में व्याप्त है।

धार्मिक आतंकवाद :-

  • धर्म को आधार मानकर प्रसारित की गई सुनियोजित हिंसा धार्मिक आतंकवाद कहलाती है। इस आतंकवाद के मूल में धार्मिक श्रेष्ठ्ता की भावना होती है। आधुनिक समय में धार्मिक आतंकवाद ही आतंकवाद के रूप में समझा जाता है।
    • यदि सुनियोजित हिंसा का उद्देश्य साम्यवादी तत्वों से प्रेरित हो तो उसे वामपंथी आतंकवाद या नक्सलवाद कहा जाता है। परन्तु यदि हिंसा का मूल

विचारधारात्मक आतंकवाद : धार्मिक, सांस्कृतिक तत्वों से प्रेरित हो तो उसे दक्षिणपंथी आतंकवाद का नाम दिया जाता है।

धार्मिक आतंकवाद के विभिन्न स्तर तथा भारत

भारत के दृष्टिकोण से आतंकवाद के महत्वपूर्ण स्तर हैं

  • वैश्विक आतंकवाद
  • सीमापार आतंकवाद
  • घरेलू आतंकवाद

वैश्विक आतंकवाद :-

  • इस प्रकार के आतंकवाद का प्रभाव वैश्विक स्तर पर होता है। ये मुख्य रूप से पश्चिमी देशो ( अमेरिका, यूरोप) को लक्षित करते हैं।वैश्विक आतंकवाद की प्रथम तथा भयावह झलक अमेरिका में 9/11 के हमले के दौरान दिखी थी। हाल के समय में वैश्विक आतंकवाद का स्वरूप फ्रांस तथा ऑस्ट्रिया में देखने को मिला है।

भारत का रुख :-

  • भारत अहिंसा तथा लोकतंत्र को मानने के कारण आतंकवाद के सभी स्वरूप का विरोध करता है। इसीलिए अमेरिका द्वारा आतंक के विरुद्ध कार्यवाही में जब 2011 में पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मारा गया तब भारत ने इस कदम को सार्थक बताया था। भारत ने कई बार वैश्विक आतंकवाद को प्रतिबंधित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रयास किये हैं जिसके चलते संयुक्त राष्ट्र संघ ने मसूद अजहर को प्रतिबंधित भी किया है। इसके साथ ही भारत द्विपक्षीय वार्ताओं में भी आतंकवाद को मुद्दा बना रहा है। अभी हाल ही में हुए भारत तथा मध्यएशिया वार्ता में आतंकवाद के विरुद्ध समझौते किये गए हैं।

सीमा पार आतंकवाद :-

  • आतंकवाद की इस विधा में वे नागरिक सम्मिलित होते हैं जो भारत के नागरिक नहीं होते परन्तु किसी धार्मिक उद्देश्य अथवा पड़ोसी देशो द्व्रारा प्रायोजित होने पर देश में आतंकी घटनाओ को अंजाम देते हैं। इसके साथ ही ये भारत में चल रहे अलगाववादी आंदोलनों को भी सहायता देते है। जम्मू कश्मीर इन गतिविधियों से सर्वाधिक प्रभावित है। पुलवामा, मुंबई 26/11, पठानकोट जैसे आतंकी हमलो में पाकिस्तान द्वारा आतंकियो के समर्थन के स्पष्ट साक्ष्य मिले।

भारत का रुख :-

  • सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए भारत बहुस्तरीय प्रयास करता है। भारत में सेना, कानून व्यवस्था ने इनसे निदान की व्यवस्थाएं की हैं। पुलवामा हमले के उपरांत हुई एयर स्ट्राइक तथा पूर्व में हुई सर्जिकल स्ट्राइक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध सैन्य कार्यवाहियों का भी प्रयोग कर सकता है परन्तु आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। इसी क्रम में भारत ने आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की नीति के कारण पाकिस्तान से द्विपक्षीय सम्बन्धो को भी निलंबित कर दिया।

घरेलू आतंकवाद :-

  • कई बार सापेक्षिक वंचना, पहचान संकट तथा बहुसंख्यक समुदाय की बढ़ती कटटरता तथा सांप्रदायिक तत्वों की समाज में उपस्थिति घरेलू आतंकवाद का रूप ले लेती है। भारत का समाज तथा राष्ट्र अभी परिपक्वता की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं ऐसे में साम्प्रदायिकता इस निर्माण में बाधा बनती है।

भारत का रुख :-

  • कहीं न कहीं घरेलू आतंकवाद की जड़ो में सामाजिक आर्थिक वंचना रहती है अतः संविधान द्वारा अल्पसंख्यको को दिए गए अधिकारों को मूल अधिकारों में रखा है जिसका अभिरक्षण उच्चतम न्यायालय करता है।
  • भारत में हो रही आतंकी गतिविधियों, साम्प्रदायिकता से निदान हेतु भारतीय संसद द्वारा यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम) जैसे कानूनों का निर्माण किया है।
  • भारत के सुरक्षा बल निरंतर देश में सुरक्षा का माहौल बनाने में संलग्न हैं।

आतंकवाद का बदलता स्वरूप :-

  • तकनीकी उन्नति के साथ साथ आतंकवाद में भी परिवर्तन हुए हैं। सूचना तकनीकी में क्रांति आने से आतंकी भी अब तकनीकी का प्रयोग कर युवा, वंचित, शरणार्थियों का ब्रेन वाश कर आतंकी घटनाओ को अंजाम दे रहे हैं। इस प्रकार के आतंक को साइबर आतंकवाद कहा जाता है
            • आतंकवाद के कारण 
  • आर्थिक सामाजिक वंचना 
  • प्रशासनिक वंचना सरकार सत्ता का वंचना 
  • धार्मिक विचारधारा 
  • सांस्कृत की वंचना 
  • भौगोलिक वंचना 
  • बन्दूक, मशीन गन, तोपें, एटम बोम, हाईड्रोजन बम, परमाणु हथियार, मिसाइल आदि का अधिक मात्रा में निर्माण होना.
  • आबादी का तेजी से बढ़ना
  • राजनैतिक, सामाजिक, अर्थव्यवस्था
  • देश की व्यवस्था के प्रति असंतुष्ट
  • शिक्षा की कमी
  • गलत संगति
  • बहकावे में आना
  • आतंकवाद का असर/ दुष्परिणाम (Effect of Terrorism) –

    आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य सामाजिक व राजनैतिक सिस्टम को आहात पहुचाना है. आतंकवाद का असर सबसे ज्यादा आम जनता को होता है. आतंकवादी समूह देश की सरकार को बताने के लिए ये सब करते है, लेकिन जिस पर वे ये जुल्म ढाते है, वे उन्ही के भाई बहन होते है, मासूम होते है, जिनका सरकार, आतंकवाद से कोई लेना देना नहीं होता है. एक बार ऐसा कुछ देखने के बाद इन्सान के मन में जीवनभर के लिए डर पैदा हो जाता है, वो घर से निकलने तक में हिचकता है. माँ को डर लगा रहता है, उसका बच्चा घर वापस आएगा की नहीं.

    • आतंकवाद से लोगों में डर पैदा हो जाता है, वे अपने राज्य, देश में असुरक्षित महसूस करते है.
    • आतंकवाद के सामने कई बार सरकार भी कमजोर दिखाई देती है, जिससे लोगों का सरकार पर से भरोसा उठते जा रहा है.
    • आतंकवाद को मुद्दा बनाकर किसी भी सरकार को गिराया जा सकता है
    • आतंकवाद के चलते लाखों की सम्पति नष्ट हो जाती है, हजारों लाखों मासूमों की जान चली जाती है.
    • जीव-जंतु भी मारे जाते है.
    • मानवजाति का एक दुसरे से भरोसा उठ जाता है.
    • एक आतंकवादी गतिविधि देखने के बाद दूसरा आतंकवादी भी पैदा होने लगता है.
    • देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्र में आतंकवाद के रूप –

      आज आतंकवाद सिर्फ भारत की ही समस्या नहीं है, हमारे पड़ोसी देश, और विदेश सभी जगह की सरकारें इससे निपटने के लिए भरपूर कोशिश में लगी हुई है. विश्व का आजतक का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का माना जाता है. 11 सितम्बर 2001 में, विश्व के सबसे शक्तिशाली देश के सबसे ऊँची ईमारत पर ओसामा बिन लादेन ने आतंकवादी हमला करवाया था, जिसके चलते लाखों का नुकसान हुआ और हजारों-लाखों लोग मलबे के नीचे दब के मर गए थे. अमेरिका ने अपने सबसे बड़े दुश्मन को बड़े फ़िल्मी तरीके से मारा था. अमेरिका वालों ने ओसामा को मारने के लिए एक ओपरेशन किया था, उसने उसके घर पाकिस्तान में घुस कर उसे मार डाला था, और ये सब रिकॉर्ड हो रहा था, जिसे अमेरिका की सरकार लाइव बैठ कर देख रही थी.

    • 2015 में पाकिस्तान में करांची के स्कूल में कुछ आतंकवादी घुस गए थे और उन्होंने अंधाधुंध गोलियां चलाई थी, जिससे कई बच्चे टीचर मारे गए थे. कहते है, पाकिस्तान का आतंकवाद में सबसे बड़ा हाथ है, लेकिन खुद पाकिस्तान इसके दुष्प्रभाव से अछुता नहीं है.

    • आतंकवाद हादसे भारत में (Terrorism Attack India)–

      • 2001 में देश के सबसे सुरक्षित इमारत, संसद भवन में दिन दहाड़े आतंकवादी घुस गए थे. पुलिस व सुरक्षाकर्मी के साथ लम्बी मुठभेड़ के बाद आतंकवादीयों को मार गिराया गया था. इस दौरान पूरी संसद में दहशत का माहोल था, चारों तरफ अफरा तफरी थी.
      • 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन को निशाना बनाया गया था, 11 min के अन्तराल में 7 बम ब्लास्ट किये गए थे, जिससे कई बच्चे, बूढ़े, महिला, नौजवान की जान गई थी.
      • 2008 में मुंबई की होटल ताज व ओबरॉय में आतंकवादी घुस गए थे, और कई दिनों तक वहां पर लोगों को बंदी बना कर रखा था. आतंकवादी अपनी मांग पूरी करवाना चाहते थे. लम्बी मुठभेड़ के बाद 1 आतंकवादी को मार गिराया गया था, तथा दुसरे कसाब को गिरफ्तार कर लिया गया था. कसाब को 2012 में फांसी की सजा हुई थी.
      • कश्मीर को लेकर भारत पाकिस्तान की लड़ाई अब बड़ा रूप ले चुकी है. 1999 में कारगिल की लड़ाई इसी का रूप थी, पाकिस्तान के तरफ से शुरू हुआ युद्ध को भारत ने अपनी जीत के साथ ख़त्म किया था. कश्मीर को भारत में आतंकवाद का गढ़ माना जाता है, यहाँ आये दिन कोई न कोई हलचल होती रहती है. धरती का स्वर्ग कश्मीर में आज लोग जाने से डरते है, निर्देशक यहाँ फिल्म की योजना बनाते है, लेकिन दंगों के चलते वे पूरी ही नहीं हो पाती है. यहाँ आम जनता के साथ साथ, हमारे सैनिक भी मारे जाते है.

      • भारत में 14 फरवरी 2019 को पुलवामा आंतकवादी हमला हुआ, इस हमले में 37 जवान शहीद हुए और अनेक जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे.
      • मई 2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद में आंतकवादी विस्फोट हुआ, इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी.
      • 13 मई 2008 को जयपुर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुआ और 68 लोगों की मौत हुई.
      • अक्टूबर 2007 अजमेर शरीफ दरगाह में विस्फोट हुआ और दो लोगों की मौत हुई.
      • जनवरी 2008 को रामपुर में CRPF के जवानो पर आंतकी हमला हुआ, इस हमले में 8 जवान शहीद हुए.
      • भारत में आतंकवाद अटैक की लिस्ट लम्बी ही होती जा रही है, जिहाद के नाम पर नासमझ, छोटी उम्र के बच्चों को गलत शिक्षा दी जाती है, जिसके चलते वे इंसानियत भूल कर, गलत राह में चल पड़ते है. आजकल बहला फुसलाकर, पैसो के नाम पर नौजवान को मानव बम बना दिया जाता है, ये बहुत ही क्रूर काम है. इसी आतंकवाद के चलते इंदिरा गाँधी व राजीव गाँधी की हत्या की गई थी.

        आतंकवाद की समस्या का निदान (Solution of Terrorism Problem)–

        • धर्म को सही ढंग से समझना होगा. मानवजाति धर्म, जातिवाद के भंवर में इस कदर फंस गई है, कि धर्म के उपर इंसानियत के बारे में सोचती ही नहीं है. धर्म हमारी सुविधा के लिए है,  धर्म अच्छी शिक्षा, ज्ञान की बातें इंसानियत  सिखाता. हमें धर्म, जाति के उपर इंसानियत को रखना चाहिए. दुनिया में प्यार से बड़ी कोई चीज नहीं है, कहते है ‘भगवान् प्यार है, प्यार ही भगवान् है’. गॉड ने हमें अपने आस पास अपने पड़ोसी से प्यार करने की शिक्षा दी है, वो हमें कहता है “दूसरों की गलती माफ़ करो जैसे मैं करता हूँ”. अगर हम भगवान की बात का सही मतलब समझेंगें, तो देश दुनिया से आतंकवाद जैसी कुरीथियां निकल जाएगी और चारों तरफ प्यार होगा.
        • आतंकवाद को दूर करने के लिए अच्छी शिक्षा की बहुत जरूरत है. अनुकूल शिक्षा मिलने पर इन्सान की सोच बदलेगी, उसकी सोचने समझने की शक्ति में बदलाव आएगा और वो सही दिशा में ही सोचेगा. शिक्षित व्यक्ति अपना अच्छा बुरा जानता है, उसको गलत शिक्षा देकर बहलाया नहीं जा सकता.

        आतंकवाद से निपटने के लिए देश दुनिया को मिल कर काम करना होगा, और इसलिए हर साल 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है. इस समस्या से लड़ने के लिए एक अकेला देश कुछ नहीं कर सकता, क्यूंकि ये विश्व व्यापी समस्या है.


निष्कर्ष :-

  • आतंकवाद महज एक हिंसात्मक गतिविधि नहीं है बल्कि यह देश तथा समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक तथा रक्षा के ताने बाने पर हमला कर देश के सतत विकास में बाधक बनता है। किसी भी रूप में आतंकवाद समाज तथा राष्ट्र के लिए घातक है।परन्तु कहीं न कहीं गलत धार्मिक अवधारणाओं पर आधारित आतंकवाद पर विश्व का एकमत न होना आतंक के विरुद्ध राह में सबसे बड़ा अवरोधक है। अतः आवश्यक है कि सभी देशो को सामाजिक आर्थिक न्याय, शरणार्थी संकट, मानवाधिकार के हनन जैसे समस्याओं को वैश्विक स्तर पर हल करते हुए आतंकवाद के सभी स्वरूपों के विरुद्ध एकमत होकर इसे समाप्त करना आवश्यक है।
 

क्या है जैव आतंक?

  • वर्तमान में आतंक के एक नए हथियार के रूप में उच्च तकनीकी आधारित जैव आतंक का प्रयोग किया जाने लगा है। जैव आतंक का प्रयोग न केवल आतंकवादी समूह कर रहे हैं, बल्कि शक्ति संपन्न राष्ट्र भी प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में भाग न लेकर परोक्ष रूप से जैव आतंकवाद का सहारा ले रहे हैं। 
  • आधुनिक काल में जैव आतंकवाद को ऐसी क्रूर गतिविधि के रूप में चिन्हित किया जा सकता है जिसके अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विषाणुओं, जीवाणुओं तथा विषैले तत्वों को मानव द्वारा ही प्राकृतिक अथवा परिवर्धित रूप में विकसित कर अपने लक्ष्य संधान हेतु किसी राष्ट्र के विरूद्ध निर्दोष जन, पशुओं अथवा पौधों को गंभीर हानि पहुँचाने हेतु योजनाबद्ध रूप से मध्यस्थ साधन के रूप में दुरूपयोग किया जाता है।
  • वर्तमान समय में आत्मघाती जैव आतंकवाद की समस्या भी सामने आ रही है जिसमें आतंकवादी स्वयं को घातक रोगकारी संक्रमण से संक्रमित करने के पश्चात सामान्यजन के मध्य जा कर उन्हें भी संक्रमित कर देता है और पूरे क्षेत्र को विनाशक रोग से भर देता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    • ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में मेसोपोटामिया के अस्सूर साम्राज्य के लोगों ने शत्रुओं के पानी पीने के कुओं में एक विषाक्त कवक डाल दिया था, जिससे व्यापक पैमाने पर शत्रुओं की मृत्यु हो गई थी। 
    • यूरोपीय इतिहास में तुर्की तथा मंगोल साम्राज्यों द्वारा संक्रमित पशु शरीरों को शत्रु राज्य के जल स्रोतों में डलवा कर संक्रमित करने के कई उदाहरण मिलते हैं। प्लेग महामारी के रूप में बहुचर्चित ‘ब्लैक डेथ’ (Black Death) के फैलने का प्रमुख कारण तुर्की तथा मंगोल सैनिकों द्वारा रोग पीडि़त मृत पशु शरीरों को समीपवर्ती नगरों में फेंका जाना बताया जाता है।
    • आधुनिक युग में जैविक हथियारों का पहली बार प्रयोग जर्मन सैनिकों द्वारा प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) में एंथ्रेक्स तथा ग्लैंडर्स के जीवाणुओं द्वारा किया गया था।
    • जापान-चीन युद्ध (1937-1945) तथा द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) में शाही जापानी सेना की विशिष्ट शोध इकाई ने चीनी नागरिकों तथा सैनिकों पर जैविक हथियारों के प्रयोग किये जो बहुत प्रभावशाली नहीं सिद्ध हो पाए परंतु नवीन अनुमानों के अनुसार, लगभग 6,00,000 आम  नागरिक प्लेग संक्रमित खाद्य पदार्थों के प्रयोग से प्लेग तथा हैजा बीमारी से पीड़ित हुए थे।
    • वर्ष 2001 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एंथ्रेक्स के आक्रमण के कई मामले सामने आये थे जिसमें आतंकवादियों ने एंथ्रेक्स संक्रमित पत्र अमेरिकी कांग्रेस के कार्यालयों में भेजे जिसके कारण पाँच व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी। इस घटना ने राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैव सुरक्षा तथा जैव आक्रमण से बचाव के उपाय विकसित करने की आवश्यकता को पर्याप्त बल प्रदान किया था।
    • जैविक हथियार से तात्पर्य  

      • जैव आतंकवाद के माध्यम से प्रायः विषाणु या जीवाणु के साथ नई तकनीकी की सहायता से हमला किया जाता है जो अन्य हथियारों से और भी ज्यादा खतरनाक होता है। उल्लेखनीय है कि कीटाणुओं, विषाणुओं अथवा फफूंद जैसे संक्रमणकारी तत्वों जिन्हें जैविक हथियार कहा जाता है, का युद्ध में नरसंहार के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है।
      • जैव आतंकवाद के वाहक के रूप में तकरीबन 200 प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, फंगस पर्यावरण में मौजूद हैं। एंथ्रेक्स, प्लेग, बोटूलिज्म, टूलेरीमिया, ग्लैन्डर, जैसे खतरनाक जीव इसमें शामिल हैं। 
      • कई वाहक पाउडर के रूप में होते हैं। इन्हें आसानी से पानी या हवा में छोड़ा जा सकता है या किसी के भोजन में मिलाया जा सकता है। ये 24 घंटे के अंदर प्राणी और अन्य जीवों की जान ले सकते हैं।

      रासायनिक हथियार

      • एक रासायनिक हथियार मानव निर्मित रसायन के उपयोग से बनता है। अर्थात् रासायनिक हथियारों में उन हथियारों का इस्तेमाल होता है जो घातक रसायनों के उपयोग से बनते हैं और आबादी के लिये जान और माल के नुकसान का कारण बनते हैं।
      • ये हथियार जीवन को नष्ट करने के लिये इस्तेमाल किये जाते हैं। रासायनिक युद्ध से संपूर्ण मानवीय समुदाय को खत्म किया जा सकता है। रासायनिक हथियारों में ज़हरीला रसायन होता है जो IEDs, Mortars, मिसाइलों और अन्य एजेंटों का उपयोग कर प्रसारित किया जाता है।
      • इन्हीं एजेंटों के कारण विस्फोट होता है और परिणामस्वरूप ज़हरीले रासायनिक हवा में फैल जाते हैं। इस रसायन से किसी भी व्यक्ति की कुछ ही सेकेंड में मौत हो सकती है। इन रासायनिक हथियारों का प्रभाव तब तक रहता है जब तक हवा को साफ नहीं कर दिया जाता है। रासायनिक हथियार के कुछ उदाहरण- मस्टर्ड गैस, सरीन, क्लोरीन, हाइड्रोजन साइनाइड और टीयर गैस के रूप में हैं।
      • परमाणु हथियार

        • परमाणु हथियार रासायनिक हथियारों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि इनके विनाश की कोई सीमा नहीं होती है। एक परमाणु हथियार जीवन के साथ-साथ उससे संबंधित हर चीज को नष्ट कर सकता है। परमाणु हथियार का परिनियोजन पूरे शहर को नष्ट कर सकता है और आसपास की चीजों को खत्म कर सकता है।
        • परमाणु हथियार में परमाणु विखंडन की प्रक्रिया होती है जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर यह विस्फोट करने में सक्षम होता है।
        • परमाणु हथियार के कुछ उदाहरण हैं- परमाणु बम, हाइड्रोजन बम, न्यूट्रॉन बम, यूरेनियम, प्लूटोनियम आदि।

        जैविक हथियार नियंत्रण के लिये प्रयास

        • जैविक हथियार के निर्माण और प्रयोग पर रोक लगाने के लिये कई विश्व में कई सम्मेलन हुए। सबसे पहले वर्ष 1925 में जिनेवा प्रोटोकॉल के तहत कई देशों ने जैविक हथियारों के नियंत्रण के लिये बातचीत शुरू की।
        • वर्ष 1972 में बायोलॉजिकल वेपन कन्वेंशन (Biological weapon Convention) की स्थापना हुई और 26 मार्च 1975 को 22 देशों ने इसमें हस्ताक्षर किये। भारत वर्ष 1973 में बायोलॉजिकल वेपन कन्वेंशन (BWC) का सदस्य बना और आज 183 देश इसके सदस्य हैं।
        • भारत में जैव आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिये गृह मंत्रालय एक नोडल एजेंसी है इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ, पर्यावरण मंत्रालय इत्यादि भी सक्रिय रुप से जैव आतंकवाद पर कार्य कर रहे हैं।
        • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जैव आतंकवाद से निपटने हेतु एक दिशा-निर्देश तैयार किया है जिसमें सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी एजेंसियों की सहभागिता पर भी बल दिया गया है।
        • चुनौतियाँ

          • जैव-आतंकवाद आज के समय में सबसे बड़ा खतरा है और सशस्त्र बलों की चिकित्सा सेवाओं को इस समस्या से निपटने में सबसे आगे होना चाहिये। आज के संदर्भ में जैव आतंकवाद ‘संक्रामक रोग’ के रूप में फैल रहा है।
          • परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों के कारण स्थिति निरंतर जटिल होती जा रही है जिससे नई चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं।
          • विशेषज्ञों का मानना है कि जैव आतंकवाद की रोकथाम की क्षमता केवल पशु चिकित्सकों में ही है। विश्व स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कमीशन फॉर जुनोसिस की स्थापना की है। इसके तहत जुनोसिस डिज़ीज कंट्रोल बोर्ड एवं कंट्रोल ऑफ वेक्टर बॉर्न डिज़ीज सेंटर कार्यरत हैं। भारत में इसे लेकर गंभीरता काफी कम है, जबकि आए दिन यहाँ आतंकवादी हमले होते रहते हैं।

          आगे की राह 

          • जैव आतंकवाद के वाहकों की रोकथाम के लिये सरकार को वाइल्ड लाइफ हेल्थ सेंटर, फॉरेन्सिक सेंटर, जुनोसिस सेंटर की स्थापना किये जाने की आवश्यकता है। टीके और नई औषधियों पर शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। 
          • चूँकि जैव आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है अतः सभी हितधारकों को मिलजुल कर ना केवल इस दिशा में सुरक्षा उपायों को अपनाए जाने की आवश्यकता है बल्कि भविष्य में ऐसी आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिये शोध की भी आवश्यकता होगी।
          • जैविक आपदा प्रबंधन से संबंधित राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी किये जाने की जरूरत है। आतंकवादियों द्वारा जैविक हथियार इस्तेमाल कर सकने की आशंका के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। 
          • जैविक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच उचित सहयोग होना चाहिये, लेकिन अगर इसका प्रभावी ढंग से सामना करना है तो जिलों तथा स्थानीय निकायों के बीच समन्वय और भी आवश्यक है।
                          •  by राममिलन कुशवाहा 



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