मोदी सरकार के 10 विवादित / बुरे काम:

 यहाँ मोदी सरकार (2014–2024) के 10 विवादित या आलोचनात्मक कार्यों की सूची दी गई है, जिन्हें आम लोगों, विपक्षी दलों और विशेषज्ञों ने "कमज़ोर या बुरे फैसले" माना है। ये तथ्य-आधारित आलोचनाएं हैं जो विभिन्न रिपोर्टों और सार्वजनिक विमर्श पर आधारित हैं


⚠️ मोदी सरकार के 10 विवादित / बुरे काम:


1. नोटबंदी (2016)


👉 ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए गए।

📉 असर: कैश आधारित अर्थव्यवस्था को झटका, लाखों छोटे व्यापारी प्रभावित, रोज़गार घटे।



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2. GST का जल्दबाज़ी में लागू होना (2017)


👉 एक टैक्स सिस्टम, लेकिन बहुत जटिल संरचना।

📉 असर: छोटे व्यवसायों को दिक्कत, शुरुआती सालों में व्यापार धीमा पड़ा।



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3. बेरोजगारी में रिकॉर्ड वृद्धि


👉 CMIE के अनुसार 45 साल में सबसे ज़्यादा बेरोजगारी 2017-18 में।

📉 असर: युवाओं में नाराज़गी और नौकरी की कमी।



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4. कोरोना प्रबंधन में असफलता (2020-21)


👉 दूसरी लहर में ऑक्सीजन की भारी किल्लत और स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई।

📉 असर: लाखों मौतें और अव्यवस्था।



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5. तीन कृषि कानून (2020)


👉 किसानों ने एक साल तक दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन किया।

📉 असर: सरकार को कानून वापस लेने पड़े।



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6. पेगासस जासूसी मामला (2021)


👉 आरोप: सरकार पत्रकारों, नेताओं और कार्यकर्ताओं की जासूसी करवा रही थी।

📉 असर: निजता और लोकतंत्र पर सवाल।



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7. बढ़ती महँगाई


👉 पेट्रोल-डीज़ल, गैस और खाद्य वस्तुओं के दाम में तेज़ी।

📉 असर: आम आदमी की जेब पर सीधा प्रभाव।



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8. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश


👉 पत्रकार, एक्टिविस्ट और विपक्ष के नेताओं को टारगेट किया गया।

📉 असर: मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठे।



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9. धार्मिक ध्रुवीकरण और मॉब लिंचिंग के मामले


👉 कई जगहों पर समुदाय विशेष को निशाना बनाया गया।

📉 असर: सामाजिक सौहार्द पर चोट।



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10. सरकारी संस्थाओं की स्वायत्तता में हस्तक्षेप


👉 ED, CBI और चुनाव आयोग जैसे संस्थानों पर दबाव के आरोप।

📉 असर: लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल।



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🎯 निष्कर्ष:


हर सरकार की तरह, मोदी सरकार ने भी कई अच्छे और कई विवादित फैसले लिए। आलोचना ज़रूरी है ताकि लोकतंत्र मजबूत रहे और जनता जागरूक बनी 


Rammilan kushwaha 


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